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TSH टेस्ट क्या है और इसकी नॉर्मल रेंज कितनी होनी चाहिए?

TSH यानी थायरॉयड स्टिम्युलेटिंग हार्मोन एक अहम ब्लड टेस्ट है, जो यह समझने में मदद करता है कि आपकी थायरॉयड ग्रंथि सही तरीके से काम कर रही है या नहीं। यह हार्मोन दिमाग की पिट्यूटरी ग्रंथि द्वारा बनता है और थायरॉयड को हार्मोन स्रावित करने का संकेत देता है। वयस्कों में TSH की मानक संदर्भ सीमा 0.4–4.0 mIU/L (adults) [ATA, 2014] मानी जाती है।

यह टेस्ट क्या मापता है?

यह टेस्ट खून में TSH की मात्रा को मापता है। थायरॉयड ग्रंथि हमारे शरीर के मेटाबॉलिज़्म और ऊर्जा स्तर को नियंत्रित करने वाले हार्मोन बनाती है। जब खून में इन हार्मोन्स का संतुलन बिगड़ता है, तो पिट्यूटरी ग्रंथि TSH का स्तर घटा या बढ़ा देती है, जिसे इस जांच से ट्रैक किया जाता है।

सामान्य रेंज

0.4–4.0 mIU/L (adults) [ATA, 2014]

स्रोत (Source): [ATA, 2014]

हर लैब की रेंज थोड़ी अलग हो सकती है — आपकी रिपोर्ट पर छपी रेंज ही आप पर लागू होती है।

स्तर कम होने का क्या मतलब है?

यदि TSH का स्तर 0.4 mIU/L [ATA, 2014] से कम आता है, तो डॉक्टर इस संभावना का आकलन करते हैं कि थायरॉयड ग्रंथि आवश्यकता से अधिक हार्मोन बना रही हो (हाइपरथायरॉइडिज्म)। डॉक्टर किसी नतीजे पर पहुँचने से पहले आमतौर पर फ्री T3 और T4 के स्तर, मरीज़ के लक्षण और मेडिकल इतिहास की समीक्षा करते हैं।

स्तर अधिक होने का क्या मतलब है?

यदि TSH का स्तर 4.0 mIU/L [ATA, 2014] से ऊपर मिलता है, तो डॉक्टर यह जांचते हैं कि कहीं थायरॉयड ग्रंथि सुस्त तो नहीं है (हाइपोथायरॉइडिज्म)। इसका मतलब यह हो सकता है कि शरीर को पर्याप्त थायरॉयड हार्मोन नहीं मिल पा रहा है, जिसकी पुष्टि के लिए डॉक्टर अतिरिक्त जांच की सलाह दे सकते हैं।

इस टेस्ट की पूरी जानकारी अंग्रेज़ी में: TSH (English)

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